चुनाव की कहानी
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी को भारी अंतर से हराकर दिल्ली की सत्ता हासिल की।
उसने 45.6% वोट पाकर 70 सीटों में से 48 सीटें जीतीं।
इससे वह बहुमत के आँकड़े से 12 सीटें आगे रही।
आप को 43.6% वोट मिले, जो लगभग विजेता के बराबर थे, फिर भी वह सिर्फ़ 22 सीटें ही बचा पाई।
निवर्तमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली की अपनी सीट भाजपा के प्रवेश वर्मा से हार गए।1
चुनाव प्रचार
मतदान से पहले इंडियन नेशनल कांग्रेस ने एक महीने लंबी दिल्ली न्याय यात्रा शुरू की। इसका पहला चरण 8 नवंबर 2024 को राजघाट से शुरू होकर 13 नवंबर को शालीमार बाग़ में ख़त्म हुआ और इसमें 15 विधान सभा सीटें शामिल रहीं।2
दिल्ली के मंत्री कैलाश गहलोत ने यमुना की सफ़ाई समेत अधूरे वादों का हवाला देते हुए 17 नवंबर 2024 को आम आदमी पार्टी से इस्तीफ़ा दिया और अगले दिन, 18 नवंबर 2024 को, भाजपा में शामिल हो गए। अरविंद केजरीवाल ने जवाब में कहा कि गहलोत जहाँ चाहें जा सकते हैं।3
12 दिसंबर 2024 को केजरीवाल ने मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना के तहत 18 साल और उससे ज़्यादा उम्र की महिलाओं को हर महीने ₹1,000 देने का एलान किया, और वादा किया कि चुनाव के बाद यह रक़म बढ़कर ₹2,100 महीना होगी।4
केजरीवाल ने ख़ुद 5 फ़रवरी 2025 का चुनाव नई दिल्ली सीट से लड़ा और भाजपा के प्रवेश वर्मा से हार गए।1
क्या बदला
आप का लंबा शासन ढहकर ख़त्म हो गया।
इस बार भाजपा की सीटें 8 से बढ़कर 48 हो गईं।
सबसे बड़ा बदलाव आप से भाजपा की ओर रहा: जिन 42 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 41 इसी तरह बदलीं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) में पिछले चुनाव के मुक़ाबले -1.9 प्रतिशत अंक का बदलाव हुआ।
भाजपा के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) पिछले चुनाव से 7.1 प्रतिशत अंक बढ़ा।
अहम आँकड़े
सबसे क़रीबी मुक़ाबला संगम विहार, दिल्ली में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 344 वोट रहा।
मटिया महल, दिल्ली में जीत 50.6% वोटों के अंतर से हुई, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर था।
मुस्तफाबाद, दिल्ली में किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ, 69.2%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से विकासपुरी, दिल्ली सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जिसकी मतदाता सूची में 4,64,659 नाम थे।
इस चुनाव का सबसे भीड़ भरा मुक़ाबला नई दिल्ली, दिल्ली में हुआ, जहाँ मतपत्र पर 23 उम्मीदवार थे।
पूरे राज्य में (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को 53,738 वोट मिले, यानी कुल वोटों का 0.6%।
पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली शासन अधिनियम, 1991 और संविधान के 69वें संशोधन ने मिलकर 37 साल के अंतराल के बाद दिल्ली के लिए चुनी हुई विधान सभा बहाल की। नई 70 सीटों वाली विधान सभा का पहला चुनाव 1993 में हुआ।5
आम आदमी पार्टी की स्थापना 26 नवंबर 2012 को अरविंद केजरीवाल और 2011 के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन के दूसरे कार्यकर्ताओं ने की थी। उसने पहली बार 2013 का दिल्ली विधान सभा चुनाव लड़ा, 70 में से 28 सीटें जीतीं और कांग्रेस के बाहरी समर्थन से अल्पमत सरकार बनाई।6