कांग्रेस की कहीं कम अंतर से जीत
क्या हुआ
कांग्रेस अरुणाचल प्रदेश में सत्ता में बनी रही, लेकिन पहले से कहीं कम बढ़त के साथ।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 60 सीटों में से 34 सीटें जीतीं।
इससे वह 31 सीटों के बहुमत के आँकड़े से सिर्फ़ 3 सीटें आगे रही, जो अकेले सरकार चलाने के लिए काफ़ी था।
निर्दलीय उम्मीदवारों की बड़ी भीड़ ने मिलकर 13 सीटें जीतीं, जो किसी भी एक विपक्षी पार्टी से ज़्यादा थीं।
क्या बदला
इस कार्यकाल में कांग्रेस ने अकेले अपने दम पर नहीं, बल्कि एक सहयोगी दल की मदद से सरकार चलाई।
उसकी सीटें पिछले चुनाव की 53 सीटों से घटकर इस बार 34 रह गईं।
(दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) के सहयोगी दलों को मिलाकर सत्ता पक्ष कुल 34 सीटों तक पहुँचा।
राज्य भर में 13 सीटें कांग्रेस से निर्दलीय उम्मीदवारों के पास गईं, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा बदलाव था।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला: चांगलांग दक्षिण, अरुणाचल प्रदेश का फ़ैसला सिर्फ़ 3 वोटों से हुआ।
दूसरी ओर, खोंसा पूर्व, अरुणाचल प्रदेश में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) कुल वोटों का 59.4% रहा।
साल का सबसे अच्छा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) दोईमुख, अरुणाचल प्रदेश में रहा: 92.5%।
ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश में किसी भी सीट से ज़्यादा, 42,595 पंजीकृत मतदाता थे, और यहीं सबसे कम मतदान प्रतिशत भी रहा: सिर्फ़ 45.7%।
पृष्ठभूमि
कांग्रेस ने यह चुनाव एक क्षेत्रीय सहयोगी दल के साथ लड़ा, जो उसकी अपनी पार्टी के भीतर हुई पिछली टूट से बना था।