बड़ा सदन, बड़ी जीत
क्या हुआ
पूर्ण राज्य बनने के बाद के पहले चुनाव में कांग्रेस सुरक्षित अंतर से जीतकर सत्ता में बनी रही।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 60 सीटों में से 37 सीटें जीतीं, हर लिहाज़ से यह एकतरफ़ा जीत थी।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी 31 सीटों के आँकड़े से 6 सीटें ज़्यादा था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी जनता दल ने 11 सीटें जीतीं।
क्या बदला
यह इस इलाक़े का भारत के पूर्ण राज्य के रूप में पहला चुनाव था, और इस बार कहीं बड़ी विधान सभा के सदस्य चुने जाने थे।
सदन की सीटें 30 से बढ़कर 60 हो गईं।
कुल 4 दलों ने सीटें जीतीं, और 11 और सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के हिस्से गईं।
जनता दल पहली बार चुनाव लड़ रही थी, और तुरंत ही दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
मतगणना का सबसे कड़ा मुक़ाबला नारी-कोयू, अरुणाचल प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 6 वोट रहा।
दूसरी ओर, सबसे बड़ा जीत का अंतर टुटिंग-यिंगकियोंग, अरुणाचल प्रदेश में रहा, जहाँ विजेता 62.0% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) लेकांग, अरुणाचल प्रदेश में रहा, 85.9%।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश में थे, कुल 28,559 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव भारत में इस इलाक़े के दर्जे में आए एक बड़े बदलाव के बाद हुआ।
अरुणाचल प्रदेश कुछ ही समय पहले देश का पूर्ण राज्य बना था।