मद्रास राज्य के पहले चुनाव में किसी को बहुमत नहीं
क्या हुआ
मद्रास राज्य का पहला चुनाव (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा के साथ ख़त्म हुआ।
सबसे ज़्यादा सीटें इंडियन नेशनल कांग्रेस ने जीतीं, कुल 375 सीटों में से 152।
यह 188 सीटों के बहुमत के आँकड़े से काफ़ी कम था।
निर्दलीय 62 सीटों के साथ सबसे क़रीबी चुनौती देने वालों में थी।
क्या बदला
यह मद्रास राज्य का पहला विधान सभा चुनाव था।
उस साल के कुछ निर्वाचन क्षेत्र बहु-सदस्यीय थे, यानी एक ही मुक़ाबले से विधान सभा में एक से ज़्यादा सदस्य चुने जाते थे।
309 निर्वाचन क्षेत्रों में से 66 इसी तरह काम करते थे।
कुल मिलाकर विधान सभा के सदस्यों की संख्या बढ़कर 375 हो गई।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला कुडप्पा, मद्रास में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 53 वोट रहा।
सबसे बड़ी जीत पुत्तूर, मद्रास में हुई, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 53.6% आगे रहा।
राज्य में कहीं भी सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) नरसापुर, मद्रास में रहा, 88.2%।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला थाउज़ेंड लाइट्स, मद्रास में था, जहाँ एक ही सीट के लिए 17 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव आज़ादी के बाद भारत में हुए पहले चुनावों के दौर में हुआ।
अकेले मद्रास राज्य में ही 12 दलों ने कम से कम एक सीट जीती।