तमिलनाडु चुनाव में भारी जीत के साथ द्रमुक की सत्ता में वापसी
क्या हुआ
द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम ने सत्ताधारी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम को भारी अंतर से हराकर तमिलनाडु की सत्ता में वापसी की।
उसने कुल 234 सीटों में से 133 सीटें जीतीं।
इससे वह बहुमत के आँकड़े से 15 सीटें आगे रही।
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम 33.3% वोट के साथ 66 सीटों पर सिमट गई।
द्रमुक ने 37.7% वोट पाकर 56.8% सीटें जीतीं।
चुनाव प्रचार
20 अक्टूबर 2020 को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने भाजपा और पीएमके के साथ (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) से पहले एडप्पाडी के. पलानीस्वामी को अन्नाद्रमुक का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया।1
चुनाव आयोग ने 26 फ़रवरी को कार्यक्रम घोषित किया: मतदान 6 अप्रैल को और गिनती 2 मई को। अगले दिन अन्नाद्रमुक ने पीएमके के साथ सीटों के बँटवारे का समझौता पक्का किया और एस. रामदास की पार्टी को 23 सीटें दीं; इससे एक दिन पहले राज्य ने वन्नियारों के लिए 10.5% आंतरिक आरक्षण पारित किया था।23
3 मार्च 2021 को, जेल से रिहाई के कुछ हफ़्ते बाद, वी.के. शशिकला ने राजनीति छोड़ने की घोषणा की, जिससे अन्नाद्रमुक खेमे के भीतर सत्ता का एक प्रतिद्वंद्वी केंद्र हट गया।4
7 मार्च को द्रमुक के एम.के. स्टालिन और कांग्रेस के के.एस. अलागिरी ने एक समझौते पर दस्तख़त किए, जिसमें कांग्रेस को 25 सीटें और कन्याकुमारी लोक सभा सीट दी गई। कुछ दिन बाद, 12 मार्च को, मक्कल नीधि मय्यम के कमल हासन ने कोयंबटूर दक्षिण से चुनाव लड़कर चुनावी राजनीति में अपनी शुरुआत की घोषणा की।56
कांग्रेस उम्मीदवार पी.एस.डब्ल्यू. माधव राव की मतदान के पाँच दिन बाद, 11 अप्रैल को, कोविड-19 से मृत्यु हो गई। 26 अप्रैल को मद्रास हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि जानलेवा दूसरी लहर के दौरान रैलियों की इजाज़त देने के लिए आयोग पर हत्या के आरोप लगने चाहिए।78
क्या बदला
इस चुनाव का सबसे बड़ा बदलाव ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम से द्रमुक की ओर रहा।
पूरे राज्य में जिन 110 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 64 इसी में थीं।
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम का लगातार 2 चुनाव जीतने का सिलसिला बुरी हार के साथ टूट गया।
ख़ुद द्रमुक की सीटें इस बार 89 से बढ़कर 133 हो गईं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) में पिछले चुनाव के मुक़ाबले -2.0 प्रतिशत अंक का बदलाव हुआ।
अहम आँकड़े
इस चुनाव का सबसे कड़ा मुक़ाबला त्यागराय नगर, तमिलनाडु में हुआ: (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 137 वोट था।
इस चुनाव में सबसे बड़ा जीत का अंतर आथूर, तमिलनाडु में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 59.0% वोट आगे रहा।
मतदान प्रतिशत पालकोड, तमिलनाडु में सबसे ऊँचा रहा, जहाँ 87.4% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला — यह राज्य की किसी भी सीट में सबसे ज़्यादा था।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से शोझिंगनल्लूर (शोऴिंगनल्लूर), तमिलनाडु सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जिसकी मतदाता सूची में 6,99,612 नाम थे; किसी भी सीट में सबसे कम मतदान प्रतिशत (55.5%) भी यहीं दर्ज हुआ।
सबसे ज़्यादा उम्मीदवार करूर, तमिलनाडु में उतरे, बैलट पर 77 नाम थे।
पूरे राज्य में (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को 3,45,538 वोट मिले, यानी कुल वोटों का 0.7%।
पृष्ठभूमि
17 अक्टूबर 1972 को द्रमुक ने एम.जी. रामचंद्रन को पार्टी कोषाध्यक्ष पद से निकाल दिया, और इसके कुछ ही समय बाद उन्होंने अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम बनाई।9
12 सितंबर 1976 को इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम किया गया, और यह तमिलनाडु की दूसरी बड़ी द्रविड़ पार्टी बन गई।9
द्रमुक और अन्नाद्रमुक 1977 से राज्य का हर विधान सभा चुनाव लड़ती आई हैं; इस परिणाम ने यह अटूट प्रतिद्वंद्विता तोड़ी नहीं, बल्कि आगे बढ़ाई।9