तमिलनाडु 2016 का नक्शा लोड हो रहा है…

पार्टी के हिसाब से सीटें
ADMK: 134 सीटें (57.8%)DMK: 89 सीटें (38.4%)INC: 8 सीटें (3.4%)IUML: 1 सीट (0.4%)बहुमत के लिए 117232सरकार बनाने के लिए 117
चुनाव की कहानी

जयललिता की अन्नाद्रमुक ने तमिलनाडु पर पकड़ बनाए रखी

क्या हुआ

ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम ने तमिलनाडु में सरकार चलाने का लगातार दूसरा कार्यकाल जीता।

उसने 232 सीटों में से 134 सीटें जीतीं।

इससे वह बहुमत के आँकड़े से 17 सीटें आगे रही।

उसे 40.8% वोट मिले, जो 57.8% सीटों में बदले।

द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम 31.6% वोट और 89 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।

74.8% तक पहुँचा।

चुनाव प्रचार

12 फ़रवरी 2016 को चुनाव आयोग ने घोषणा की कि तमिलनाडु की 17 सीटों के लगभग 4,000 मतदान केंद्रों पर पेपर-ट्रेल वाली वोटिंग मशीनें लगेंगी। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम ज़ैदी ने 4 मार्च को चुनाव कार्यक्रम तय किया: मतदान 16 मई को और गिनती 19 मई को।12

23 मार्च को विजयकांत ने घोषणा की कि उनकी देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम वाइको के पीपुल्स वेलफ़ेयर मोर्चा में शामिल होगी और वे उसके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। अगले महीने 25 साल के जेंडर एक्टिविस्ट गोपी शंकर मदुरई ने मदुरई उत्तर से नामांकन भरा और इस चुनाव में खुले तौर पर इंटरसेक्स और जेंडरक्वीयर पहचान वाले पहले उम्मीदवार बने।34

उसी हफ़्ते द्रमुक ने सीटों का बँटवारा तय किया और सहयोगी इंडियन नेशनल कांग्रेस को 41 सीटें दीं। अन्नाद्रमुक ने कहा कि वह राज्य की 234 में से 227 सीटों पर ख़ुद चुनाव लड़ेगी, और मुख्यमंत्री जे. जयललिता आर.के. नगर से दोबारा चुनाव लड़ेंगी।56

मतदान से कुछ दिन पहले चुनाव आयोग ने नक़दी की ज़ब्ती और रिश्वत की शिकायतों के चलते अरवक्कुरिची और तंजावूर में मतदान टाल दिया और इसे 23 मई को कराने का फ़ैसला किया। दो हफ़्ते बाद उसने दोनों सीटों की अधिसूचना रद्द करने की सिफ़ारिश की, और इसकी वजह मतदाताओं के लिए रखी गई 8 करोड़ रुपये से ज़्यादा की नक़दी और 2,500 लीटर शराब की ज़ब्ती बताई।78

स्रोत
  1. 1 wikipedia.org
  2. 2 wikipedia.org
  3. 3 tribuneindia.com
  4. 4 wikipedia.org
  5. 5 india.com frontline.thehindu.com
  6. 6 india.com frontline.thehindu.com
  7. 7 wikipedia.org thenewsminute.com
  8. 8 tribuneindia.com

क्या बदला

ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम तमिलनाडु में सरकार चलाती रही, हालाँकि उसकी अपनी सीटें घट गईं।

उसकी सीटें पिछले चुनाव से 16 घट गईं, जबकि उसके में +2.4 प्रतिशत अंक का बदलाव आया।

इससे उसकी जीत का सिलसिला लगातार 2 चुनावों तक पहुँच गया।

द्रमुक के मतों के हिस्से में +9.3 प्रतिशत अंक का बदलाव हुआ, जो किसी भी बड़ी पार्टी में सबसे तेज़ था।

सबसे बड़ा बदलाव ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम से द्रमुक की ओर रहा: पूरे राज्य में जिन 119 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 51 इसी तरह बदलीं।

मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव के मुक़ाबले 3.4 प्रतिशत अंक घटा।

अहम आँकड़े

इस चुनाव का सबसे कड़ा मुक़ाबला राधापुरम, तमिलनाडु में हुआ: विजेता की 49 वोट था।

इस चुनाव में सबसे बड़ा जीत का अंतर तिरुवारूर, तमिलनाडु में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 34.7% वोट आगे रहा।

किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत पालकोड, तमिलनाडु में दर्ज हुआ, जहाँ 88.6% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।

पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से शोझिंगनल्लूर (शोऴिंगनल्लूर), तमिलनाडु राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जिसकी मतदाता सूची में 6,02,472 नाम थे।

राज्य में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार डॉ. राधाकृष्णन नगर, तमिलनाडु में उतरे, बैलट पर 45 नाम थे।

पूरे राज्य में को 5,61,174 वोट मिले, यानी कुल डाले गए वोटों का 1.3%।

पृष्ठभूमि

द्रमुक ने 17 अक्टूबर 1972 को एम.जी. रामचंद्रन को पार्टी कोषाध्यक्ष पद से निकाल दिया, और उन्होंने एक प्रतिद्वंद्वी पार्टी बनाई, जिसका नाम 12 सितंबर 1976 को बदलकर ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम कर दिया गया।9

इसी टूट से राज्य की दूसरी बड़ी द्रविड़ पार्टी बनी, और द्रमुक और अन्नाद्रमुक 1977 से राज्य का हर विधान सभा चुनाव लड़ती आई हैं।9

2016 में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम की 134 सीटों वाली जीत ने यही दो-दलीय मुक़ाबला जारी रखा, और द्रमुक फिर दूसरे स्थान पर रही।

स्रोत
  1. 9 wikipedia.org

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