जोरथांग-नयाबाजारविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1999
भोज राज राय (SDF) ने 1999 के विधान सभा चुनाव में 55.3% वोट पाकर जोरथांग-नयाबाजार सीट जीती और भीम राज राय (SSP) को 1,193 वोटों से हराया।
2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 10 पोकलोक-कामरंग है।
विजेता
13.8% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
4 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | भोज राज राय | 4,79155.3% | |
| 2 | भीम राज राय SSP | SSP | 3,59841.6% |
| 3 | बीरेन चन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 1962.3% |
| 4 | दुर्गा लामा | 720.8% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SDF और SSP को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.09 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
जोरथांग-नयाबाजार से कौन जीता, 1979–2004
SDF ने 1994 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 59.0% से घटकर 55.3% रह गया। यह 1979 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1994 के 81.8% से घटकर 80.3% रह गया। इसके बाद 2004 के चुनाव में भी SDF ने यह सीट अपने पास रखी।