पलवलविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2000
करण सिंह दलाल (RPI) ने 2000 के विधान सभा चुनाव में 43.4% वोट पाकर पलवल सीट जीती और देवेन्द्र चौहान (INLD) को 13,052 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 54 गुड़गांव थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 54 लोहारू है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — करण सिंह दलाल 15.1% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | करण सिंह दलाल | 37,53943.4% | |
| 2 | देवेन्द्र चौहान NDA | NDA | 24,48728.3% |
| 3 | सुभाष चौधरी | 16,93319.6% | |
| 4 | योगेश गौड़ | 5,3696.2% | |
| 5 | जितेन्द्र सिंह रावत HVP | HVP | 1,6011.9% |
| 6 | संजय सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4310.5% |
| 7 | प्रहलाद सिंह जिन्दल ABHM | ABHM | 2280.3% |
| 8 | हुकम चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 160.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.22 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पलवल से कौन जीता, 1977–2005
RPI ने यह सीट HVP से छीन ली, जिसने इसे 1996 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह RPI की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1996 के 67.3% से बढ़कर 73.1% हो गया। इसके बाद 2005 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।