पलवलविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
करण सिंह दलाल (HVP) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 38.7% वोट पाकर पलवल सीट जीती और नित्य नन्द शर्मा (INC) को 9,874 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 54 गुड़गांव थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 54 लोहारू है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
13.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
13 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | करण सिंह दलाल HVP | HVP | 27,88238.7% |
| 2 | नित्य नन्द शर्मा | 18,00825.0% | |
| 3 | सुभाष चन्द JP | JP | 16,81123.4% |
| 4 | चंदर भान | 7,80510.8% | |
| 5 | वीरेन्द्र सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3740.5% |
| 6 | बिक्रम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2430.3% |
| 7 | किशन चन्द | 2030.3% | |
| 8 | रूप चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 1820.3% |
| 9 | सुरेश निर्दलीय | निर्दलीय | 1720.2% |
| 10 | जसोदी नन्दन निर्दलीय | निर्दलीय | 1030.1% |
| 11 | बाबू राम निर्दलीय | निर्दलीय | 920.1% |
| 12 | राकेश सिंगला HCYM | HCYM | 570.1% |
| 13 | मोहन लाल डागर निर्दलीय | निर्दलीय | 430.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 87% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.58 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पलवल से कौन जीता, 1977–2005
HVP ने यह सीट LKD से छीन ली, जिसने इसे 1987 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह HVP की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1987 के 69.3% से घटकर 64.0% रह गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में भी HVP ने यह सीट अपने पास रखी।