सिकन्दराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2000
प्रयाग चौधरी (KSP) ने 2000 के विधान सभा चुनाव में 46.1% वोट पाकर सिकन्दरा सीट जीती और जनकदेव राम (JD(U)) को 25,843 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 189 बरौनी थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से सीट नंबर 189 पटना मध्य है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — प्रयाग चौधरी 23.3% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | प्रयाग चौधरी KSP | KSP | 51,24446.1% |
| 2 | जनकदेव राम NDA | NDA | 25,40122.9% |
| 3 | लक्ष्मी देवी | 16,32214.7% | |
| 4 | गजाधर रजक | 8,7797.9% | |
| 5 | लखी चन्द पासवान | 5,8525.3% | |
| 6 | रामेश्वर पासवान निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3941.3% |
| 7 | जय प्रकाश निर्दलीय | निर्दलीय | 5450.5% |
| 8 | जितेन्द्र पासवान | 4140.4% | |
| 9 | दिलीप पासवान निर्दलीय | निर्दलीय | 3800.3% |
| 10 | रामा शंकर दिवाकर | 3740.3% | |
| 11 | शिव शंकर चौधरी | 3550.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 84% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.38 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सिकन्दरा से कौन जीता, 1977–2000
KSP ने यह सीट CPI से छीन ली, जिसने इसे 1995 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह KSP की पहली जीत थी। यह 1977 के बाद यहाँ का सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1995 के 53.7% से बढ़कर 55.7% हो गया।