मुर्शिदाबादविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
छाया घोष (FBL) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 48.7% वोट पाकर मुर्शिदाबाद सीट जीती और असक अली (INC) को 20,272 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 58 बहरामपुर थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 58 जंगीपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — छाया घोष 16.9% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
12 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | छाया घोष | 58,42448.7% | |
| 2 | असक अली | 38,15231.8% | |
| 3 | ज्योत्सना कुमार दत्त | 11,96710.0% | |
| 4 | मो. मिनारुद्दीन शेख निर्दलीय | निर्दलीय | 2,6442.2% |
| 5 | हाजी मोहिउद्दीन CPI(ML) | CPI(ML) | 2,5212.1% |
| 6 | अतहर रहमान | 1,6411.4% | |
| 7 | चौधुरी अब्दुस समद निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5541.3% |
| 8 | बिकास चक्रवर्ती निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0180.8% |
| 9 | मो. अब्बास अली | 6210.5% | |
| 10 | मंडल अब्दुल समद JP | JP | 5780.5% |
| 11 | मंडल मजीद होसेन निर्दलीय | निर्दलीय | 4390.4% |
| 12 | गैसुद्दीन शेख निर्दलीय | निर्दलीय | 3560.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
FBL, INC और BJP को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.86 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मुर्शिदाबाद से कौन जीता, 1977–2006
FBL ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1987 में जीता था; FBL ने यहाँ पिछली बार 1982 में जीत दर्ज की थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1987 के 81.5% से घटकर 76.7% रह गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।