झालदाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
सत्यन रंजनक महतो (FBL) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 42.5% वोट पाकर झालदा सीट जीती और सुभाष चन्द्र महतो (INC) को 5,926 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 237 बड़जोड़ा थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 237 बिनपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
6.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सत्यन रंजनक महतो | 37,85242.5% | |
| 2 | सुभाष चन्द्र महतो | 31,92635.8% | |
| 3 | दुबराज महतो | 9,80111.0% | |
| 4 | मोहितोष महतो | 7,4508.4% | |
| 5 | नरेन्द्र नाथ महतो JP | JP | 6470.7% |
| 6 | पाशु पति महतो AMB | AMB | 4720.5% |
| 7 | सुफल कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 4620.5% |
| 8 | कैबर्ता बैद्यनाथ HJP | HJP | 4480.5% |
| 9 | कुमुद रंजन महतो निर्दलीय | निर्दलीय | 990.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.05 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
झालदा से कौन जीता, 1977–2006
FBL ने 1987 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 52.6% से घटकर 42.5% रह गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1987 के 73.6% से घटकर 69.3% रह गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में भी FBL ने यह सीट अपने पास रखी।