झालदाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1982
सुभाष चन्द्र महतो (INC) ने 1982 के विधान सभा चुनाव में 44.7% वोट पाकर झालदा सीट जीती और सत्य रंजन महतो (FBL) को 4,465 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 237 बड़जोड़ा थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 237 बिनपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
6.9% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुभाष चन्द्र महतो | 28,96744.7% | |
| 2 | सत्य रंजन महतो | 24,50237.8% | |
| 3 | कुमुद महतो निर्दलीय | निर्दलीय | 4,1886.5% |
| 4 | बैद्यनाथ कैबरता निर्दलीय | निर्दलीय | 4,1676.4% |
| 5 | सेख युसुफ निर्दलीय | निर्दलीय | 2,3063.6% |
| 6 | पशुपति महतो निर्दलीय | निर्दलीय | 5010.8% |
| 7 | सुरेन्द्र कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 1830.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, FBL और एक निर्दलीय को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.84 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
झालदा से कौन जीता, 1977–2006
INC ने यह सीट FBL से छीन ली, जिसने इसे 1977 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1977 के 53.8% से बढ़कर 67.4% हो गया। इसके बाद 1987 के चुनाव में यह सीट FBL ने जीती।