जलपाईगुड़ीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1977
निर्मल कुमार बोस (FBL) ने 1977 के विधान सभा चुनाव में 38.5% वोट पाकर जलपाईगुड़ी सीट जीती और देवेन्द्र मोहन सरकार (JNP) को 6,342 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 20 कालिम्पोंग थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 20 माल है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
14.4% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | निर्मल कुमार बोस | 16,94938.5% | |
| 2 | देवेन्द्र मोहन सरकार जनता | जनता | 10,60724.1% |
| 3 | सरोजित कुमार बागची | 8,93420.3% | |
| 4 | दिलीप भट्टाचार्य्या SUC | SUC | 2,0404.6% |
| 5 | मनोहर चन्द्र सरकार निर्दलीय | निर्दलीय | 1,8834.3% |
| 6 | प्रसान्त कुमार सिन्हा निर्दलीय | निर्दलीय | 1,6723.8% |
| 7 | हरि सरकार निर्दलीय | निर्दलीय | 8091.8% |
| 8 | सत्येंद्र मोहन बागची निर्दलीय | निर्दलीय | 4721.1% |
| 9 | सोम्भू नाथ मुखार्जी निर्दलीय | निर्दलीय | 3510.8% |
| 10 | जबोर मोहतो निर्दलीय | निर्दलीय | 3060.7% |
| 11 | परेश चन्द्र गूह राय निर्दलीय | निर्दलीय | 510.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 83% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.95 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
जलपाईगुड़ी से कौन जीता, 1977–2006
इसके बाद 1982 के चुनाव में भी FBL ने यह सीट अपने पास रखी।