सबसे क़रीबी मुक़ाबला
क्या हुआ
सरकार फिर बदली, और इस बार दो सबसे बड़ी पार्टियों के बीच बेहद कड़ा मुक़ाबला हुआ।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 70 में से 32 सीटें जीतीं, और विधान सभा फिर (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) रही।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी 31 सीटों के साथ ठीक पीछे थी।
क्या बदला
सरकार फिर बदली, लेकिन इस बार बहुत मामूली अंतर से।
कांग्रेस ने 32 सीटें जीतीं और भाजपा ने 31 — दोनों लगभग बराबरी पर रहीं।
इस चुनाव में उत्तराखंड का अब तक का सबसे अच्छा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी रहा: लगभग 66.6% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
अहम आँकड़े
मतगणना के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: रानीखेत, उत्तराखंड का फ़ैसला सिर्फ़ 78 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला घनशाली, उत्तराखंड में हुआ, जहाँ विजेता ने दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को 33.1% वोटों के अंतर से हराया।
हरिद्वार, उत्तराखंड में किसी भी सीट से ज़्यादा, 1,21,669, पंजीकृत मतदाता थे।
उस साल सबसे ज़्यादा उम्मीदवार सहसपुर, उत्तराखंड में उतरे, कुल 23।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव से पहले उत्तराखंड की अपनी क्षेत्रीय पार्टी में भी खुलेआम फूट पड़ गई थी।