कानपुर कैंटविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
गणेश दीक्षित (JD) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 38.5% वोट पाकर कानपुर कैंट सीट जीती और पशुपत नाथ मेहरोत्रा (INC) को 7,581 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 290 खजुहा थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 290 भरथना है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
9.9% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | गणेश दीक्षित राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 29,51138.5% |
| 2 | पशुपत नाथ मेहरोत्रा | 21,93028.6% | |
| 3 | हरि दीक्षित | 16,56621.6% | |
| 4 | बाबू राम शुक्ला निर्दलीय | निर्दलीय | 4,6236.0% |
| 5 | शिव प्रसाद | 2,6063.4% | |
| 6 | राम केवल | 4780.6% | |
| 7 | मोहम्मद इजहार निर्दलीय | निर्दलीय | 4460.6% |
| 8 | बाबू बनारसी निर्दलीय | निर्दलीय | 2160.3% |
| 9 | रमेश चन्द्र आनन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 2070.3% |
| 10 | प्रभात निर्दलीय | निर्दलीय | 1440.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.56 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कानपुर कैंट से कौन जीता, 1974–1996
JD ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। यह 1974 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 27.6% से बढ़कर 38.2% हो गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।
- 1974श्याम मिश्रा (INC), जीत का अंतर 6.0%
- 1977बाबू राम शुक्ला (JNP), जीत का अंतर 27.2%
- 1980भूधर नारायण मिश्र (INC(I)), जीत का अंतर 12.2%
- 1985पशुपति नाथ (INC), जीत का अंतर 45.9%
- 1989गणेश दीक्षित (JD), जीत का अंतर 9.9%
- 1991सतीश महाना (BJP), जीत का अंतर 21.0%
- 1993सतीश महाना (BJP), जीत का अंतर 20.2%
- 1996सतीश महाना (BJP), जीत का अंतर 38.2%