कोलअसलाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
उदैल (CPI) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 46.0% वोट पाकर कोलअसला सीट जीती और राम करण पटेल (INC) को 20,214 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 245 मुग़लसराय थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 245 राबर्ट्सगंज है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — उदैल 21.5% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
13 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | उदैल वाम दल | वाम दल | 43,21446.0% |
| 2 | राम करण पटेल | 23,00024.5% | |
| 3 | फूल चन्द मौर्या | 13,94414.9% | |
| 4 | पूरनमासी | 8,4559.0% | |
| 5 | गुलाब | 1,4141.5% | |
| 6 | गोपी नाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0491.1% |
| 7 | दया शंकर निर्दलीय | निर्दलीय | 6610.7% |
| 8 | चिंदर निर्दलीय | निर्दलीय | 4480.5% |
| 9 | प्रभु नारायण निर्दलीय | निर्दलीय | 4420.5% |
| 10 | महादेव निर्दलीय | निर्दलीय | 4150.4% |
| 11 | अमर निर्दलीय | निर्दलीय | 2800.3% |
| 12 | सेचन प्रसाद SSD | SSD | 2610.3% |
| 13 | हैदर अली निर्दलीय | निर्दलीय | 2550.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 85% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.30 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कोलअसला से कौन जीता, 1974–1996
CPI ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; CPI ने यहाँ पिछली बार 1980 में जीत दर्ज की थी। यह 1974 के बाद यहाँ का सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1985 के 48.1% से घटकर 43.4% रह गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में भी CPI ने यह सीट अपने पास रखी।