विदिशाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
मोहर सिंह ठाकुर (BJP) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 65.9% वोट पाकर विदिशा सीट जीती और रूद्र प्रताप सिंह (INC) को 24,522 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 248 बड़नगर थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से कोई सीट नंबर 248 नहीं है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — मोहर सिंह ठाकुर 37.9% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
14 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मोहर सिंह ठाकुर | 42,69465.9% | |
| 2 | रूद्र प्रताप सिंह | 18,17228.1% | |
| 3 | पदम सिंह वाम दल | वाम दल | 2,0333.1% |
| 4 | प्रेम सिंह यादव | 4530.7% | |
| 5 | शिखर चन्द जैन | 3830.6% | |
| 6 | धर्मेन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 2300.4% |
| 7 | श्री राम विश्वकर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 2060.3% |
| 8 | छोटे लाल जैन निर्दलीय | निर्दलीय | 1700.3% |
| 9 | शालिग्राम दुलारे निर्दलीय | निर्दलीय | 1690.3% |
| 10 | कवूल चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 1250.2% |
| 11 | शंकर लाल नामदेव निर्दलीय | निर्दलीय | 650.1% |
| 12 | राधे लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 360.1% |
| 13 | राम बाबू सोनी निर्दलीय | निर्दलीय | 280.0% |
| 14 | राजेन्द्र कुमार राम प्रकाश निर्दलीय | निर्दलीय | 230.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP और INC को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 1.95 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
विदिशा से कौन जीता, 1977–1998
BJP ने यहाँ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1980 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 54.5% से बढ़कर 65.9% हो गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1985 के 52.9% से घटकर 49.5% रह गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।