विदिशाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
मोहरसिंह ठाकुर (BJP) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 54.5% वोट पाकर विदिशा सीट जीती और राजमल (INC) को 5,936 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 248 बड़नगर थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से कोई सीट नंबर 248 नहीं है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
10.8% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मोहरसिंह ठाकुर | 29,86254.5% | |
| 2 | राजमल | 23,92643.7% | |
| 3 | चित्रगुप्त गोपीवल्लभ श्रीवास्तव निर्दलीय | निर्दलीय | 4450.8% |
| 4 | मोबत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3560.7% |
| 5 | पुरूषोत्तम निर्दलीय | निर्दलीय | 1550.3% |
| 6 | लक्ष्मण सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 520.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP और INC को 98% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.05 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
विदिशा से कौन जीता, 1977–1998
BJP ने 1980 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 48.0% से बढ़कर 54.5% हो गया। मतदान प्रतिशत 1980 के 61.2% से घटकर 52.9% रह गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।