सरकार बदली
क्या हुआ
इस चुनाव में राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार की जगह नई सरकार आई।
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने 81 सीटों में से 30 सीटें जीतीं।
इससे उसे भाजपा पर साफ़ बढ़त मिली, जिसने 25 सीटें जीतीं।
फिर भी उसका अपना (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) सिर्फ़ 18.7% था।
क्या बदला
चुनावों के इस सिलसिले में पहली बार भाजपा सीटों में अपनी बढ़त खो बैठी।
झामुमो ने एक नए (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) की अगुवाई करते हुए सत्ता संभाली।
झारखंड महागठबंधन के सहयोगी दलों के साथ उसकी कुल सीटें 47 तक पहुँचीं।
उसकी जगह लेने वाली पार्टी से ज़्यादा मतों का हिस्सा पाने के बावजूद वह हार गई: 33.4% बनाम 18.7%।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
इस चुनाव की सबसे कड़ी टक्कर सिमडेगा, झारखंड में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 285 वोट रहा।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) नाला, झारखंड में दर्ज हुआ, 78.6%।
दूसरी ओर, मतगणना की सबसे बड़ी जीत मझगांव, झारखंड में हुई, जहाँ जीत का अंतर 35.9% वोट रहा।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से बोकारो, झारखंड सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जहाँ मतदाता सूची में 5,26,660 नाम थे।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव के बाद एक नया सत्ताधारी गठबंधन सत्ता में आया।