भाजपा का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन
क्या हुआ
यहाँ तब तक किसी भी पार्टी का यह सबसे मज़बूत प्रदर्शन था।
भारतीय जनता पार्टी ने 81 सीटों में से 37 सीटें जीतीं।
फिर भी यह अपने दम पर बहुमत से कम था, और उसका (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 31.3% रहा।
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा 19 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
अपने दम पर बहुमत न होने के बावजूद वह सरकार बना पाई।
(दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) के सहयोगी दलों के साथ कुल सीटें 42 हो गईं, जो बहुमत के आँकड़े से ज़्यादा थीं।
भाजपा अब लगातार 3 चुनावों में सीटों के मामले में सबसे आगे रह चुकी थी।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
इस चुनाव की सबसे कड़ी टक्कर तोरपा, झारखंड में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 43 वोट रहा।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पाकुड़, झारखंड में दर्ज हुआ, 80.8%।
दूसरी ओर, मतगणना की सबसे बड़ी जीत जमशेदपुर पूर्व, झारखंड में हुई, जहाँ जीत का अंतर 41.7% वोट रहा।
झारखंड में (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) का विकल्प पहली बार मतपत्र पर आया और उसे 2,35,039 वोट मिले, यानी कुल वोटों का 1.7%।
पृष्ठभूमि
नए राज्य के रूप में उथल-पुथल भरी शुरुआत के बाद झारखंड की राजनीति स्थिर होने लगी थी।