लगभग बराबरी का परिणाम
क्या हुआ
यह (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) सदन था।
भारतीय जनता पार्टी ने 18 सीटें जीतीं।
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने भी ठीक उतनी ही, 18 सीटें जीतीं।
दोनों में फ़र्क़ (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) का था: 20.2% बनाम 15.2%।
क्या बदला
इस बार राज्य के दो सबसे बड़े दलों का मुक़ाबला आख़िरी पल तक चला।
दो दलों ने यहाँ पहली बार सीटें जीतीं: झारखण्ड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक)।
भाजपा अब लगातार 2 चुनावों में सीटों के मामले में सबसे आगे रही है।
फिर भी उसकी अपनी सीटें घटीं: 30 से 18।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
इस चुनाव की सबसे कड़ी टक्कर हटिया, झारखंड में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 25 वोट रहा।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) बहरागोड़ा, झारखंड में दर्ज हुआ, 76.0%।
दूसरी ओर, मतगणना की सबसे बड़ी जीत जगन्नाथपुर, झारखंड में हुई, जहाँ जीत का अंतर 31.3% वोट रहा।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से बोकारो, झारखंड सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जहाँ मतदाता सूची में 4,44,370 नाम थे।
पृष्ठभूमि
यह इस नए राज्य के इतिहास का शुरुआती दौर ही था।
पहले की उथल-पुथल के बाद झारखंड की विधान सभा अब भी सँभलने की कोशिश में थी।