चुनाव की कहानी
क्या हुआ
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा झारखंड की सत्ता में बनी रही और भारतीय जनता पार्टी से आगे रही।
उसने 81 सीटों में से 34 सीटें जीतीं।
(कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) में भाजपा आगे रही: 33.2% बनाम 23.4%।
अपने दम पर वह 41 सीटों के बहुमत के आँकड़े से पीछे रह गई।
उसके पीछे खड़े (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) गठबंधन ने कुल 56 सीटें जीतीं।
चुनाव प्रचार
ज़मीन घोटाले के एक मामले में 31 जनवरी 2024 को हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया और प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया। उनकी जगह चंपाई सोरेन मुख्यमंत्री रहे, जब तक ज़मानत पर रिहा हुए हेमंत सोरेन 4 जुलाई को फिर इस पद पर नहीं लौटे।1
चंपाई सोरेन ने 2 फ़रवरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और चुनाव से पहले के दौर में झामुमो के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार की अगुवाई की।2
19 मार्च को झामुमो की मौजूदा विधायक और हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन ने पार्टी से इस्तीफ़ा दिया और भाजपा में शामिल हो गईं।3
झारखंड हाई कोर्ट ने 28 जून को सोरेन को ज़मानत दी, और रिहाई के कुछ दिन बाद 4 जुलाई को वे फिर मुख्यमंत्री बने। उसी साल बाद में चंपाई सोरेन ख़ुद झामुमो छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए और अपनी नई पार्टी के प्रमुख प्रचारक बने।456
चुनाव में झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन ने झामुमो को 43 सीटों पर, कांग्रेस को 30, राजद को 7 और भाकपा (माले) लिबरेशन को 4 सीटों पर उतारा; सामने भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन था, जिसमें भाजपा 68, आजसू 10, जदयू 2 और लोजपा (राम विलास) 1 सीट पर लड़ी।7
क्या बदला
वही गठबंधन फिर सत्ता में बना रहा, और शीर्ष पर उसका हाल का सिलसिला आगे बढ़ा।
झामुमो अब लगातार 2 चुनावों में सरकार की अगुवाई कर चुकी है।
उसकी अपनी सीटें भी 30 से बढ़कर 34 हो गईं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) 68.3% तक पहुँचा — राज्य में अब तक का सबसे ऊँचा।
सबसे बड़ा बदलाव भाजपा से झामुमो की ओर रहा: जिन 34 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 6 इसी तरह बदलीं।
अहम आँकड़े
सबसे कड़ा मुक़ाबला मांडू, झारखंड में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 231 वोट रहा।
सबसे बड़ी जीत चाईबासा, झारखंड में हुई, 39.2% वोटों के अंतर से।
सभी सीटों में सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत इस बार नाला, झारखंड में रहा: 81.1%।
इस चुनाव में एक पार्टी, भाकपा (माले), ने झारखंड में पहली बार कोई सीट जीती।
पूरे राज्य में (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को 2,26,431 वोट मिले, यानी कुल वोटों का 1.3%।
पृष्ठभूमि
झारखंड 15 नवंबर 2000 को बिहार पुनर्गठन अधिनियम के तहत दक्षिणी बिहार के अठारह ज़िलों को अलग करके भारत का 28वाँ राज्य बना। इसका पहला विधान सभा चुनाव 2005 में हुआ।8