नारायणगढ़विधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
सुरजीत कुमार (BSP) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 22.4% वोट पाकर नारायणगढ़ सीट जीती और अशोक कुमार (INC) को 4,538 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में भी सीट नंबर 2 का नाम नारायणगढ़ था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 2 पंचकुला है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
6.6% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
18 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुरजीत कुमार | 15,40722.4% | |
| 2 | अशोक कुमार | 10,86915.8% | |
| 3 | भारत भूषण | 9,98214.5% | |
| 4 | जगपाल सिंह चौधरी JP | JP | 7,91711.5% |
| 5 | विनोद कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 7,58111.0% |
| 6 | लाल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 6,4039.3% |
| 7 | हाथी सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4,4476.5% |
| 8 | रोशन लाल आर्य HVP | HVP | 1,7562.6% |
| 9 | प्रीतपाल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3011.9% |
| 10 | जयपाल निर्दलीय | निर्दलीय | 6971.0% |
| 11 | भाकमल निर्दलीय | निर्दलीय | 5540.8% |
| 12 | राम नाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 3690.5% |
| 13 | राणा महाराज सिंह चौहान निर्दलीय | निर्दलीय | 3600.5% |
| 14 | धर्म चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 2710.4% |
| 15 | सुखदेव सिंह | 2300.3% | |
| 16 | जगबीर सिंह राणा निर्दलीय | निर्दलीय | 2220.3% |
| 17 | लज्जा राम निर्दलीय | निर्दलीय | 1730.3% |
| 18 | मायाराम निर्दलीय | निर्दलीय | 1290.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को सिर्फ़ 53% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 7.34 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
नारायणगढ़ से कौन जीता, 1977–2005
BSP ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1987 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह BSP की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1987 के 76.4% से घटकर 72.0% रह गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में यह सीट HVP ने जीती।