महेन्द्रगढ़विधान सभा चुनाव का परिणाम, 1987
राम बिलास (BJP) ने 1987 के विधान सभा चुनाव में 57.9% वोट पाकर महेन्द्रगढ़ सीट जीती और हरि सिंह (INC) को 27,432 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में कोई सीट नंबर 88 नहीं थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 88 बल्लभगढ़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — राम बिलास 35.7% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | राम बिलास | 44,48157.9% | |
| 2 | हरि सिंह | 17,04922.2% | |
| 3 | दलीप सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 13,15617.1% |
| 4 | मदनसिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2971.7% |
| 5 | महाबीर निर्दलीय | निर्दलीय | 3980.5% |
| 6 | बाबू लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 2350.3% |
| 7 | दान सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1470.2% |
| 8 | अमर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1050.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP, INC और एक निर्दलीय को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.42 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
महेन्द्रगढ़ से कौन जीता, 1977–2005
BJP ने 1982 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 50.5% से बढ़कर 57.9% हो गया। मतदान प्रतिशत 1982 के 72.6% से घटकर 71.3% रह गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।