पांकीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2000
मधु सिंह (SAP) ने 2000 के विधान सभा चुनाव में 24.8% वोट पाकर पांकी सीट जीती और विदेश सिंह (निर्दलीय) को 37 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 318 हुसैनाबाद थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से कोई सीट नंबर 318 नहीं है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
पांकी का फ़ैसला सिर्फ़ 0.1% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 37 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
15 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मधु सिंह NDA | NDA | 17,09524.8% |
| 2 | विदेश सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 17,05824.7% |
| 3 | संकटेश्वर सिंह | 7,20510.4% | |
| 4 | विश्वनाथ सिंह CPI(ML)(L) | CPI(ML)(L) | 6,6019.6% |
| 5 | गणेश महतो | 5,1297.4% | |
| 6 | परमदेव सिंह | 4,6226.7% | |
| 7 | मो. आलम निर्दलीय | निर्दलीय | 4,2506.2% |
| 8 | श्रीपति सिंह NDA | NDA | 2,4103.5% |
| 9 | विष्णुगुण सिंह | 1,4052.0% | |
| 10 | श्याम सुन्दर मिस्त्री | 1,0091.5% | |
| 11 | गुप्तेश्वर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 5880.8% |
| 12 | कमल किशोर पाण्डेय निर्दलीय | निर्दलीय | 5700.8% |
| 13 | बबन मांझी JKP | JKP | 4420.6% |
| 14 | सुरेन्द्र राम AJBP | AJBP | 3950.6% |
| 15 | प्रदीप रजक निर्दलीय | निर्दलीय | 2680.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को सिर्फ़ 60% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 6.32 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पांकी से कौन जीता, 1977–2000
SAP ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1995 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह SAP की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1995 के 57.4% से घटकर 44.4% रह गया।