बड़हराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2000
राघवेन्द्र प्रताप सिंह (RJD) ने 2000 के विधान सभा चुनाव में 41.8% वोट पाकर बड़हरा सीट जीती और भाई ब्रह्मेश्वर (SAP) को 6,583 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 215 ब्रहमपुर थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से सीट नंबर 215 चेनारी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
12 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | राघवेन्द्र प्रताप सिंह | 47,86741.8% | |
| 2 | भाई ब्रह्मेश्वर | 41,28436.0% | |
| 3 | सियामती राय निर्दलीय | निर्दलीय | 10,4149.1% |
| 4 | भागीरथ सिंह CPI(ML)(L) | CPI(ML)(L) | 9,4518.2% |
| 5 | बनारसी देवी | 3,0942.7% | |
| 6 | चन्द्र मणि दुबे | 7280.6% | |
| 7 | राम निवास निषाद | 3640.3% | |
| 8 | बबनेश्वर प्रसाद सिंह बागी SSD | SSD | 3560.3% |
| 9 | कृष्ण राज प्रसाद सिंह यादव | 3300.3% | |
| 10 | हरेश्वर प्रसाद सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3190.3% |
| 11 | आशा देवी निर्दलीय | निर्दलीय | 2140.2% |
| 12 | सुखलाल यादव निर्दलीय | निर्दलीय | 2100.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 87% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.13 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बड़हरा से कौन जीता, 1977–2000
RJD ने यह सीट JD से छीन ली, जिसने इसे 1995 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह RJD की पहली जीत थी। यह 1980 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1995 के 56.5% से बढ़कर 59.9% हो गया।