दिनाराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1969
रामानंद प्रसाद सिंह (INC) ने 1969 के विधान सभा चुनाव में 29.6% वोट पाकर दिनारा सीट जीती और राम आशीष सिंह (SHD) को 4,859 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में भी सीट नंबर 228 का नाम दिनारा था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 228 रामगढ़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
8.3% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रामानंद प्रसाद सिंह | 17,24229.6% | |
| 2 | राम आशीष सिंह SHD | SHD | 12,38321.3% |
| 3 | राम नारायण साहू निर्दलीय | निर्दलीय | 10,43017.9% |
| 4 | शिवपूजन सिंह | 7,15312.3% | |
| 5 | रामपरीखा तिवारी Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 2,9325.0% |
| 6 | सरजू राम निर्दलीय | निर्दलीय | 2,3324.0% |
| 7 | राम सुभोग चौधरी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,7243.0% |
| 8 | ठाकुर प्रसाद चौधरी स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 1,5982.7% |
| 9 | बालाजी ओझा | 1,0421.8% | |
| 10 | कैलासपति सहाय JAP | JAP | 8351.4% |
| 11 | रामजी चौधरी PBI | PBI | 5761.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 69% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.37 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
दिनारा से कौन जीता, 1967–1972
INC ने यह सीट SSP से छीन ली, जिसने इसे 1967 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1967 के 66.9% से घटकर 61.8% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट NCO ने जीती।