काटीगड़ाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2011
अताउर रहमान मज़रभुइया (AIUDF) ने 2011 के विधान सभा चुनाव में 32.4% वोट पाकर काटीगड़ा सीट जीती और अनवारुल हक (INC) को 6,142 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 15 उधारबंद थी। 2021 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2026 से सीट नंबर 15 दुधनई है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
6.0% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अताउर रहमान मज़रभुइया | 33,22632.4% | |
| 2 | अनवारुल हक UPA | UPA | 27,08426.4% |
| 3 | अनिल चन्द्र दे NDA | NDA | 19,13318.7% |
| 4 | अमर चन्द जैन निर्दलीय | निर्दलीय | 12,80812.5% |
| 5 | अनूप कुमार दत्त | 3,8923.8% | |
| 6 | कुमारजीत देब UPA | UPA | 2,1482.1% |
| 7 | जी.एम.सी. साहब उद्दीन अहमद निर्दलीय | निर्दलीय | 1,8801.8% |
| 8 | असित चन्द्र दे निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5011.5% |
| 9 | आलोक सेन | 8570.8% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 77% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.39 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
उम्मीदवारों ने क्या घोषित किया
उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफ़नामों में आपराधिक मामले घोषित किए दर्ज मामलों का मतलब सज़ा नहीं है — किसी लंबित मामले से कोई दोषी साबित नहीं होता।
घोषित संपत्ति का मध्य मान ₹0.42 करोड़ आधे उम्मीदवारों की संपत्ति इससे कम है।
यह सीट नंबर 2026 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2026 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
काटीगड़ा से कौन जीता, 1978–2021
AIUDF ने यह सीट AUDF से छीन ली, जिसने इसे 2006 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1978 से शुरू होता है, यह AIUDF की पहली जीत थी। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2006 के 69.0% से बढ़कर 74.6% हो गया। इसके बाद 2016 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।
- 1978अब्दुल कय्यूम चौधुरी (INC), जीत का अंतर 9.1%
- 1983नेपाल चन्द्र दास (INC), जीत का अंतर 6.8%
- 1985अब्दुल हमीद मजुमदार (ICS), जीत का अंतर 9.6%
- 1991काली रंजन देब (BJP), जीत का अंतर 22.1%
- 1996काली रंजन देब (BJP), जीत का अंतर 8.0%
- 2001काली रंजन देब (BJP), जीत का अंतर 8.3%
- 2006अताउर रहमान मज़रभुइया (AUDF), जीत का अंतर 15.2%
- 2011अताउर रहमान मज़रभुइया (AIUDF), जीत का अंतर 6.0%
- 2016अमर चन्द जैन (BJP), जीत का अंतर 6.5%
- 2021खलील उद्दीन मजुमदार (INC), जीत का अंतर 4.3%