महाराजगंजविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1994
पी. रामास्वामी (BJP) ने 1994 के विधान सभा चुनाव में 26.7% वोट पाकर महाराजगंज सीट जीती और एम. मुकेश (निर्दलीय) को 197 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 214 सिकंदराबाद थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 214 गुंटूर पूर्व है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
महाराजगंज का फ़ैसला सिर्फ़ 0.4% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 197 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
26 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पी. रामास्वामी | 14,20626.7% | |
| 2 | एम. मुकेश निर्दलीय | निर्दलीय | 14,00926.3% |
| 3 | के. प्रेम सिंह राठौर | 11,81522.2% | |
| 4 | के. केशव राव | 11,65021.9% | |
| 5 | केशव जाधव निर्दलीय | निर्दलीय | 3200.6% |
| 6 | येर्रुजु ब्रह्मम निर्दलीय | निर्दलीय | 2420.5% |
| 7 | ओस्मानबिन छालेह | 1200.2% | |
| 8 | दामु गुरु निर्दलीय | निर्दलीय | 1190.2% |
| 9 | हंस कुमार जायसवाल समाजवादी पार्टी | समाजवादी पार्टी | 840.2% |
| 10 | डी. नरसिंह राव निर्दलीय | निर्दलीय | 630.1% |
| 11 | सप्पिडी श्रीरामुलु NPPOLD | NPPOLD | 630.1% |
| 12 | के. कृष्ण निर्दलीय | निर्दलीय | 570.1% |
| 13 | कन्हैयालाल RPP | RPP | 560.1% |
| 14 | सूरजमल निर्दलीय | निर्दलीय | 500.1% |
| 15 | सैयद कमर अहमद निर्दलीय | निर्दलीय | 480.1% |
| 16 | वाई. दयानंद NSP | NSP | 430.1% |
| 17 | इनयात ख़सान (पाशा) निर्दलीय | निर्दलीय | 350.1% |
| 18 | जी. इन्द्र सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 320.1% |
| 19 | एम. श्रीलाल भैते निर्दलीय | निर्दलीय | 310.1% |
| 20 | सरदार जगत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 300.1% |
| 21 | टी. गुलाब सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 260.1% |
| 22 | के. शिवानंद निर्दलीय | निर्दलीय | 220.0% |
| 23 | बी. सुरेन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 210.0% |
| 24 | पंडित राजा रामशास्त्री निर्दलीय | निर्दलीय | 210.0% |
| 25 | पंगला नरसिम्हुलु यादव निर्दलीय | निर्दलीय | 150.0% |
| 26 | एस. सागर सोलंकी निर्दलीय | निर्दलीय | 100.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 75% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.20 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
महाराजगंज से कौन जीता, 1978–2004
BJP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1989 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1978 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1989 के 60.2% से घटकर 55.9% रह गया। इसके बाद 1999 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।