पुरूलियाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2001
निखिल मुखार्जी (CPM) ने 2001 के विधान सभा चुनाव में 48.8% वोट पाकर पुरूलिया सीट जीती और कामाख्या प्रसाद सिंह देव (AITC) को 5,509 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 239 ओंदा थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 239 बलरामपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। निखिल मुखार्जी 4.7% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | निखिल मुखार्जी वाम मोर्चा | वाम मोर्चा | 57,12448.8% |
| 2 | कामाख्या प्रसाद सिंह देव | 51,61544.1% | |
| 3 | गोविन्द मुखार्जी | 4,4273.8% | |
| 4 | प्रबीर महतो निर्दलीय | निर्दलीय | 2,2331.9% |
| 5 | धीरेण रजक JKP(N) | JKP(N) | 1,7161.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPM, AITC और BJP को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.30 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पुरूलिया से कौन जीता, 1977–2006
CPM ने यहाँ लगातार चौथी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1987 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 48.1% से बढ़कर 48.8% हो गया। मतदान प्रतिशत 1996 के 76.6% से घटकर 68.0% रह गया। इसके बाद 2006 के चुनाव में भी CPM ने यह सीट अपने पास रखी।