रासबिहारी एवेन्यूविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2001
शोभनदेब चट्टोपाध्याय (AITC) ने 2001 के विधान सभा चुनाव में 64.3% वोट पाकर रासबिहारी एवेन्यू सीट जीती और सीताराम बेहानी (JD(S)) को 27,388 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 149 बड़तला थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 149 कसबा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — शोभनदेब चट्टोपाध्याय 42.4% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शोभनदेब चट्टोपाध्याय AITC + INC | AITC + INC | 41,56264.3% |
| 2 | सीताराम बेहानी | 14,17421.9% | |
| 3 | समीर चटर्जी | 4,8827.6% | |
| 4 | शंकर बनर्जी PDS | PDS | 1,5552.4% |
| 5 | दीपांकर नस्कर निर्दलीय | निर्दलीय | 1,4422.2% |
| 6 | कुन्दन कुमार दास निर्दलीय | निर्दलीय | 9911.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
AITC और JD(S) को 86% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.13 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
रासबिहारी एवेन्यू से कौन जीता, 1977–2006
AITC ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1996 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह AITC की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1996 के 68.4% से घटकर 52.1% रह गया। इसके बाद 2006 के चुनाव में भी AITC ने यह सीट अपने पास रखी।