रतुआविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1996
समर मुखार्जी (INC) ने 1996 के विधान सभा चुनाव में 48.1% वोट पाकर रतुआ सीट जीती और मोज़म्मेल हक (CPM) को 2,966 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 43 माणिकचक थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 43 हबीबपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। समर मुखार्जी 2.7% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | समर मुखार्जी | 53,34748.1% | |
| 2 | मोज़म्मेल हक वाम मोर्चा | वाम मोर्चा | 50,38145.5% |
| 3 | शिबा प्रसाद साहा | 4,1093.7% | |
| 4 | सुलेमान निर्दलीय | निर्दलीय | 1,7151.6% |
| 5 | सीताराम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0100.9% |
| 6 | साधन मिश्र निर्दलीय | निर्दलीय | 2800.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC और CPM को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.27 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
रतुआ से कौन जीता, 1977–2006
INC ने यह सीट CPM से छीन ली, जिसने इसे 1991 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1982 में जीत दर्ज की थी। मतदान प्रतिशत 1991 के 76.3% से बढ़कर 83.5% हो गया। इसके बाद 2001 के चुनाव में यह सीट CPM ने जीती।