रतुआविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
ममताज बेगम (CPM) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 47.8% वोट पाकर रतुआ सीट जीती और बिस्वनाथ गूह (INC) को 4,412 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 43 माणिकचक थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 43 हबीबपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। ममताज बेगम 4.6% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ममताज बेगम वाम मोर्चा | वाम मोर्चा | 45,58647.8% |
| 2 | बिस्वनाथ गूह | 41,17443.2% | |
| 3 | श्यामल राय | 6,1716.5% | |
| 4 | बदीरुद्दीन | 1,4791.6% | |
| 5 | संतोष मंडल | 5110.5% | |
| 6 | श्रीदाम ठोकदार AMB | AMB | 1890.2% |
| 7 | अनवर निर्दलीय | निर्दलीय | 1260.1% |
| 8 | हिमाद्री घोष निर्दलीय | निर्दलीय | 830.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPM, INC और BJP को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.38 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
रतुआ से कौन जीता, 1977–2006
CPM ने 1987 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 50.2% से घटकर 47.8% रह गया। मतदान प्रतिशत 1987 के 77.0% से घटकर 76.3% रह गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।