ओंदाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1982
अनिल मुखोपाध्याय (FBL) ने 1982 के विधान सभा चुनाव में 51.0% वोट पाकर ओंदा सीट जीती और शंभू नारायण गोस्वामी (INC) को 6,459 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 252 फरीदपुर थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 252 बंकुरा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
7.9% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अनिल मुखोपाध्याय | 41,80151.0% | |
| 2 | शंभू नारायण गोस्वामी | 35,34243.1% | |
| 3 | सुशील सिन्हा निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1991.5% |
| 4 | अबुल होसेन मल्लिक निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0761.3% |
| 5 | जयदेव पाल SUC | SUC | 1,0591.3% |
| 6 | महादेब बारूई | 7300.9% | |
| 7 | लक्ष्मी कान्ता सरेन निर्दलीय | निर्दलीय | 5020.6% |
| 8 | कनक चौधुरी निर्दलीय | निर्दलीय | 2430.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
FBL और INC को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.24 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
ओंदा से कौन जीता, 1977–2006
FBL ने 1977 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 33.8% से बढ़कर 51.0% हो गया। मतदान प्रतिशत 1977 के 51.0% से बढ़कर 76.0% हो गया। इसके बाद 1987 के चुनाव में भी FBL ने यह सीट अपने पास रखी।