देवरियाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
रविन्द्र प्रताप (BJP) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 31.3% वोट पाकर देवरिया सीट जीती और सुभाष चन्द्र श्रीवास्तव (JD) को 794 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 203 सेवरही थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 203 मुहम्मदाबाद-गोहना है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
देवरिया का फ़ैसला सिर्फ़ 0.8% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 794 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
23 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रविन्द्र प्रताप | 31,09731.3% | |
| 2 | सुभाष चन्द्र श्रीवास्तव जनता दल | जनता दल | 30,30330.5% |
| 3 | महेन्द्र | 17,59717.7% | |
| 4 | दिना नाथ कुशवाहा | 9,8659.9% | |
| 5 | राम छबीला JP | JP | 4,3784.4% |
| 6 | कृष्ण पति त्रिपाठी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2451.3% |
| 7 | केदार निर्दलीय | निर्दलीय | 8970.9% |
| 8 | राघवेन्द्र प्रताप शाही निर्दलीय | निर्दलीय | 7450.8% |
| 9 | जगदीश सिंह यदुबंशी निर्दलीय | निर्दलीय | 4500.5% |
| 10 | बाबू नाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 3300.3% |
| 11 | रामानंद निर्दलीय | निर्दलीय | 3000.3% |
| 12 | गोकुल चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 2850.3% |
| 13 | द्विजेंद्र पाण्डेय | 2800.3% | |
| 14 | राम केवल चौरसिया | 2640.3% | |
| 15 | सुधीर कुमार श्रीवास्तव निर्दलीय | निर्दलीय | 2530.3% |
| 16 | हरे राम निर्दलीय | निर्दलीय | 1940.2% |
| 17 | केशव चन्द रा पाण्डेय निर्दलीय | निर्दलीय | 1660.2% |
| 18 | राम अवध निर्दलीय | निर्दलीय | 1350.1% |
| 19 | मृत्युंजय निर्दलीय | निर्दलीय | 1200.1% |
| 20 | विनोद कुमार शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 1170.1% |
| 21 | रईस निर्दलीय | निर्दलीय | 1120.1% |
| 22 | उमेश शाही निर्दलीय | निर्दलीय | 940.1% |
| 23 | बृजेश कुमार पासवान निर्दलीय | निर्दलीय | 500.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.26 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
देवरिया से कौन जीता, 1974–1996
BJP ने यह सीट JD से छीन ली, जिसने इसे 1989 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1989 के 50.3% से घटकर 47.3% रह गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1974कृष्ण राय (BKD), जीत का अंतर 25.1%
- 1977कृष्ण राय (JNP), जीत का अंतर 12.8%
- 1980रूद्र प्रताप (JNP(SC)), जीत का अंतर 1.9%
- 1985फजले मसूद (INC), जीत का अंतर 21.7%
- 1989राम छबीला (JD), जीत का अंतर 19.9%
- 1991रविन्द्र प्रताप (BJP), जीत का अंतर 0.8%
- 1993रविन्द्र प्रताप मल्ल (BJP), जीत का अंतर 4.3%
- 1996सुभाष चन्द्र श्रीवास्तव (JD), जीत का अंतर 12.4%