मेरठविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
लक्ष्मी कान्त वाजपेयी (BJP) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 37.3% वोट पाकर मेरठ सीट जीती और मोहम्मद अय्युब अंसारी (JD) को 14,619 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 397 हस्तिनापुर थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 397 नकुड़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
11.8% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
28 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | लक्ष्मी कान्त वाजपेयी | 46,31737.3% | |
| 2 | मोहम्मद अय्युब अंसारी राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 31,69825.5% |
| 3 | बशीर अहमद निर्दलीय | निर्दलीय | 19,95216.1% |
| 4 | जय नारायण शर्मा | 17,89114.4% | |
| 5 | आग़ा महिउद्दीन शाह राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 3,0112.4% |
| 6 | नरेन्द्र पुत्र रघुबीर निर्दलीय | निर्दलीय | 2,2911.9% |
| 7 | सुन्दर लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2451.0% |
| 8 | अय्युब निर्दलीय | निर्दलीय | 4710.4% |
| 9 | हरि कृष्ण निर्दलीय | निर्दलीय | 1800.1% |
| 10 | नरेन्द्र पुत्र हरीश चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 1410.1% |
| 11 | जगमोहन | 1130.1% | |
| 12 | देवेन्द्र अत्रय निर्दलीय | निर्दलीय | 880.1% |
| 13 | यामीन निर्दलीय | निर्दलीय | 820.1% |
| 14 | अब्दुल जब्बार निर्दलीय | निर्दलीय | 770.1% |
| 15 | वाहिद | 740.1% | |
| 16 | सुलेमान निर्दलीय | निर्दलीय | 690.1% |
| 17 | उषा रानी निर्दलीय | निर्दलीय | 630.1% |
| 18 | लोकेश निर्दलीय | निर्दलीय | 610.1% |
| 19 | राज किशोर निर्दलीय | निर्दलीय | 520.0% |
| 20 | पवन कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 390.0% |
| 21 | शौकत निर्दलीय | निर्दलीय | 380.0% |
| 22 | राजेश निर्दलीय | निर्दलीय | 380.0% |
| 23 | विनोद निर्दलीय | निर्दलीय | 290.0% |
| 24 | कल्लो निर्दलीय | निर्दलीय | 210.0% |
| 25 | प्रेम चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 190.0% |
| 26 | धर्म वीर निर्दलीय | निर्दलीय | 180.0% |
| 27 | विनय कृष्ण शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 180.0% |
| 28 | राजेन्द्र कुमार गर्ग निर्दलीय | निर्दलीय | 140.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 79% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.96 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मेरठ से कौन जीता, 1974–1996
BJP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। यह 1974 के बाद यहाँ का सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1985 के 55.0% से घटकर 53.8% रह गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट JD ने जीती।