सिकंदराराऊविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
सुरेश प्रताप गांधी (JD) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 39.2% वोट पाकर सिकंदराराऊ सीट जीती और नेक राम शर्मा (निर्दलीय) को 9,457 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 370 सादाबाद थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 370 सिकंदराबाद है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
10.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुरेश प्रताप गांधी राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 34,78339.2% |
| 2 | नेक राम शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 25,32628.5% |
| 3 | साहब सिंह | 17,29419.5% | |
| 4 | पुष्पा चौहान | 9,58610.8% | |
| 5 | बबीता निर्दलीय | निर्दलीय | 9591.1% |
| 6 | तिलक सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2020.2% |
| 7 | राम प्रसाद | 1970.2% | |
| 8 | राम सहाय LKD(B) | LKD(B) | 1370.1% |
| 9 | जय वेर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1250.1% |
| 10 | भारत सिंह सवाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1140.1% |
| 11 | आराम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1070.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 87% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.52 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सिकंदराराऊ से कौन जीता, 1974–1996
JD ने यह सीट LKD से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1985 के 52.3% से घटकर 49.4% रह गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में भी JD ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1974फ़रज़ंद अली (BKD), जीत का अंतर 1.3%
- 1977नेम सिंह चौहान (JNP), जीत का अंतर 22.3%
- 1980पुष्पा चौहान (INC(I)), जीत का अंतर 4.9%
- 1985सुरेश प्रताप सिंह (LKD), जीत का अंतर 9.3%
- 1989सुरेश प्रताप गांधी (JD), जीत का अंतर 10.7%
- 1991सुरेश प्रताप गांधी (JD), जीत का अंतर 4.0%
- 1993अमर सिंह (SP), जीत का अंतर 16.4%
- 1996यशपाल सिंह चौहान (BJP), जीत का अंतर 3.5%