इटावाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
सुखदा मिश्रा (JD) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 45.3% वोट पाकर इटावा सीट जीती और अतुल कुमार दुबे उर्फ़ अतुल आक्रोश (INC) को 20,300 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 304 बिल्हौर थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 304 नरैनी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — सुखदा मिश्रा 22.4% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
20 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुखदा मिश्रा राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 41,04345.3% |
| 2 | अतुल कुमार दुबे उर्फ़ अतुल आक्रोश | 20,74322.9% | |
| 3 | अशोक कुमार उर्फ़ अशोक दुबे | 16,41118.1% | |
| 4 | ज़हीर अहमद निर्दलीय | निर्दलीय | 4,9815.5% |
| 5 | कृपा शंकर गोयल उर्फ़ सत्य प्रिया मानव UPRP | UPRP | 2,3942.6% |
| 6 | लखपत राय राठौर निर्दलीय | निर्दलीय | 9091.0% |
| 7 | मनमोहन सिंह JNP(JP) | JNP(JP) | 6770.8% |
| 8 | प्रेम शंकर शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 5610.6% |
| 9 | रामनाथ सिंह कुशवाहा LKD(B) | LKD(B) | 3810.4% |
| 10 | राजा राम निर्दलीय | निर्दलीय | 3750.4% |
| 11 | नारायण सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3050.3% |
| 12 | लल्लन निर्दलीय | निर्दलीय | 2970.3% |
| 13 | अनिल कुमार दुबे निर्दलीय | निर्दलीय | 2750.3% |
| 14 | खादिम अब्बास निर्दलीय | निर्दलीय | 2550.3% |
| 15 | अरविन्द कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 2470.3% |
| 16 | बाबू सिंह | 2140.2% | |
| 17 | अरविन्द कुमार निगम निर्दलीय | निर्दलीय | 1690.2% |
| 18 | सुमित्रा देवी निर्दलीय | निर्दलीय | 1500.2% |
| 19 | भुवनेश भूषण निर्दलीय | निर्दलीय | 930.1% |
| 20 | पंकज निर्दलीय | निर्दलीय | 830.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 86% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.39 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
इटावा से कौन जीता, 1974–1996
JD ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1985 के 43.0% से बढ़कर 44.4% हो गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।
- 1974सुखदा मिश्र (INC), जीत का अंतर 14.8%
- 1977सत्य देव त्रिपाठी (JNP), जीत का अंतर 20.1%
- 1980सुखदा मिश्र (INC(I)), जीत का अंतर 35.2%
- 1985सुखदा मिश्रा (INC), जीत का अंतर 16.6%
- 1989सुखदा मिश्रा (JD), जीत का अंतर 22.4%
- 1991अशोक दुबे (BJP), जीत का अंतर 16.8%
- 1993जयबीर सिंह भदौरिया (SP), जीत का अंतर 7.4%
- 1996जयवीर सिंह भदौरिया (BJP), जीत का अंतर 14.8%