प्रतापपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
राजेन्द्र त्रिपाठी (JD) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 49.2% वोट पाकर प्रतापपुर सीट जीती और श्याम सूरत उपाध्याय (INC) को 19,336 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 272 मेजा थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 272 सीसामऊ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — राजेन्द्र त्रिपाठी 17.3% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | राजेन्द्र त्रिपाठी राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 54,91049.2% |
| 2 | श्याम सूरत उपाध्याय | 35,57431.9% | |
| 3 | जोखूलाल यादव | 18,48616.6% | |
| 4 | रमाकांत दुबे | 6700.6% | |
| 5 | मधुसूदन पाण्डेय निर्दलीय | निर्दलीय | 6310.6% |
| 6 | अवधेश कुमार कुशवाहा LKD(B) | LKD(B) | 5470.5% |
| 7 | राजबहादुर यादव निर्दलीय | निर्दलीय | 4820.4% |
| 8 | परमानंद मिश्रा निर्दलीय | निर्दलीय | 2250.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
JD, INC और BSP को 98% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.69 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
प्रतापपुर से कौन जीता, 1974–1996
JD ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत लगभग 1985 जितना ही रहा: 57.0%। इसके बाद 1991 के चुनाव में भी JD ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1974हर प्रताप सिंह (BKD), जीत का अंतर 2.7%
- 1977हर प्रताप सिंह (JNP), जीत का अंतर 1.0%
- 1980श्याम सूरत उपाध्याय (INC(I)), जीत का अंतर 14.5%
- 1985श्यामसूरत उपाध्याय (INC), जीत का अंतर 4.3%
- 1989राजेन्द्र त्रिपाठी (JD), जीत का अंतर 17.3%
- 1991विक्रम जीत मौर्य (JD), जीत का अंतर 13.0%
- 1993जवाहर लाल दिवाकर (BSP), जीत का अंतर 22.1%
- 1996जोखू लाल (SP), जीत का अंतर 11.2%