पडरौनाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
असगर (CPI) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 18.4% वोट पाकर पडरौना सीट जीती और वीरेन्द्र (JD) को 728 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 197 महराजगंज थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 197 अतरौलिया है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
पडरौना का फ़ैसला सिर्फ़ 0.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 728 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
20 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | असगर वाम दल | वाम दल | 18,38918.4% |
| 2 | वीरेन्द्र राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 17,66117.7% |
| 3 | राघव प्रसाद तिवारी | 15,42615.4% | |
| 4 | रामधारी प्रसाद गुप्ता निर्दलीय | निर्दलीय | 10,90010.9% |
| 5 | सुरेन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 8,8698.9% |
| 6 | शोपालजी दास LKD(B) | LKD(B) | 6,1776.2% |
| 7 | असरफ | 5,7685.8% | |
| 8 | रामचंद्र कुशवाहा निर्दलीय | निर्दलीय | 3,9604.0% |
| 9 | बृज किशोर उर्फ़ वी. के. मिश्रा निर्दलीय | निर्दलीय | 2,8982.9% |
| 10 | नरेन्द्र कुमार | 2,1872.2% | |
| 11 | केदार निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5901.6% |
| 12 | विजय नारायण | 1,4061.4% | |
| 13 | कृष्ण पाल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1261.1% |
| 14 | नथुनी भाई चमार निर्दलीय | निर्दलीय | 9040.9% |
| 15 | बाबूराम | 9040.9% | |
| 16 | कृष्ण मोहन निर्दलीय | निर्दलीय | 5640.6% |
| 17 | एस. जे. हैदर निर्दलीय | निर्दलीय | 4350.4% |
| 18 | राम वचन निर्दलीय | निर्दलीय | 4080.4% |
| 19 | मैनुद्दीन निर्दलीय | निर्दलीय | 2250.2% |
| 20 | भगराली निर्दलीय | निर्दलीय | 1350.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को सिर्फ़ 52% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 8.36 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पडरौना से कौन जीता, 1974–1996
CPI ने यह सीट LKD से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह CPI की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 44.2% से बढ़कर 52.8% हो गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।
- 1974पुरुषोत्तम (BKD), जीत का अंतर 9.9%
- 1977पुरुषोत्तम कौशिक (JNP), जीत का अंतर 15.0%
- 1980बृज किशोर (INC(I)), जीत का अंतर 3.5%
- 1985बालेश्वर (LKD), जीत का अंतर 22.8%
- 1989असगर (CPI), जीत का अंतर 0.7%
- 1991सुरेन्द्र शुक्ला (BJP), जीत का अंतर 22.5%
- 1993बालेश्वर यादव (SP), जीत का अंतर 3.4%
- 1996रतन जीत प्रताप नारायण सिंह (INC), जीत का अंतर 12.0%