गोन्डाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
रघुराज प्रसाद उपाध्याय (INC) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 41.0% वोट पाकर गोन्डा सीट जीती और हनुमान प्रसाद तिवारी (JD) को 5,140 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 161 सादुल्लानगर थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 161 खलीलाबाद है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
6.1% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रघुराज प्रसाद उपाध्याय | 34,79141.0% | |
| 2 | हनुमान प्रसाद तिवारी राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 29,65134.9% |
| 3 | विष्णु पाल सिंह | 15,60518.4% | |
| 4 | नेवल किशोर पाण्डेय | 1,7062.0% | |
| 5 | कल्लन निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0531.2% |
| 6 | सीता राम | 5660.7% | |
| 7 | जाकिर खनारियो सेबातुआरी निर्दलीय | निर्दलीय | 5460.6% |
| 8 | संतोखी निर्दलीय | निर्दलीय | 2900.3% |
| 9 | महबूब खान निर्दलीय | निर्दलीय | 2710.3% |
| 10 | राम औतार निर्दलीय | निर्दलीय | 2560.3% |
| 11 | लतीफ अख्तर निर्दलीय | निर्दलीय | 1420.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.08 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
गोन्डा से कौन जीता, 1974–1996
INC ने 1985 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 55.1% से घटकर 41.0% रह गया। यह 1974 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 37.7% से बढ़कर 48.9% हो गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।
- 1974त्रिवेणी सहाय (BJS), जीत का अंतर 5.8%
- 1977फजूलाल बारी उर्फ़ बोने भाई (JNP), जीत का अंतर 22.0%
- 1980रघु राज प्रसाद उपाध्याय (INC(I)), जीत का अंतर 20.1%
- 1985रघु प्रसाद उपाध्याय (INC), जीत का अंतर 33.0%
- 1989रघुराज प्रसाद उपाध्याय (INC), जीत का अंतर 6.1%
- 1991तुलसी दास (BJP), जीत का अंतर 32.3%
- 1993तुलसी दास राय चंदाणी (BJP), जीत का अंतर 18.2%
- 1996विनोद कुमार सिंह उर्फ़ पंडित सिंह (SP), जीत का अंतर 8.6%