चुनाव की कहानी
क्या हुआ
तेलंगाना राष्ट्र समिति तेलंगाना की सत्ता से बाहर हो गई; उसे उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी ने चुनाव में हराया।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 119 सीटों में से 64 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए काफ़ी था, लेकिन बस किसी तरह — अकेले सरकार बनाने के लिए ज़रूरी आँकड़े से 4 सीटें ज़्यादा।
निवर्तमान सत्ताधारी पार्टी भारत राष्ट्र समिति 39 सीटों पर सिमट गई।
क्या बदला
यह चुनाव जीतने वाली पार्टी पिछले चुनाव में काफ़ी पीछे रही थी।
पिछली बार उसने सिर्फ़ 19 सीटें जीती थीं।
इस बार उसकी सीटें 45 और बढ़ीं।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) पिछले चुनाव से 11.0 प्रतिशत अंक बढ़ा।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला चेवेल्ला, तेलंगाना में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 268 वोट रहा।
साल का सबसे बड़ा जीत का अंतर चंद्रायनगुट्टा, तेलंगाना में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 53.1% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) मुनुगोडु, तेलंगाना में रहा, 92.5%।
शेरिलिंगमपल्ली, तेलंगाना राज्य की सबसे ज़्यादा मतदाताओं वाली सीट थी, जिसकी मतदाता सूची में 7,32,560 लोग दर्ज थे।
पृष्ठभूमि
निवर्तमान पार्टी ने इस चुनाव से पहले अपना नाम भी बदल लिया था।