तेलंगाना का पहला चुनाव
क्या हुआ
तेलंगाना का पहला जनादेश उस क्षेत्रीय पार्टी को मिला जिसने राज्य बनाने के लिए आंदोलन चलाया था।
तेलंगाना राष्ट्र समिति ने कुल 119 सीटों में से 63 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए काफ़ी था, लेकिन बस किसी तरह — अकेले सरकार बनाने के लिए ज़रूरी संख्या से 3 सीटें ज़्यादा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 21 सीटों के साथ काफ़ी पीछे रही।
क्या बदला
यह राज्य का पहला चुनाव था, और तुलना के लिए तेलंगाना की कोई पिछली विधान सभा नहीं थी।
इस बिलकुल नए राज्य में औसतन हर सीट पर क़रीब 14.0 उम्मीदवार मैदान में थे।
मतपत्र में (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) भी था, जिसे 0.8% वोट मिले।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला कलवाकुर्थी, तेलंगाना में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 78 वोट रहा।
साल का सबसे बड़ा जीत का अंतर बहादुरपुरा, तेलंगाना में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 69.8% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पालेर, तेलंगाना में रहा, 90.3%।
सबसे ज़्यादा मतदाताओं वाली सीट कुतुबुल्लापुर, तेलंगाना थी, जिसकी मतदाता सूची में 6,01,248 लोग दर्ज थे।
पृष्ठभूमि
यह मतदान ठीक उस समय हुआ जब नया राज्य ख़ुद अस्तित्व में आ रहा था।