भारी जीत के साथ दोबारा सत्ता
क्या हुआ
तेलंगाना राष्ट्र समिति सत्ता में बनी रही और उसने पिछले चुनाव से ज़्यादा सीटें जीतीं।
उसने कुल 119 सीटों में से 88 सीटें जीतीं।
इससे वह बहुमत के आँकड़े से 28 सीटें आगे रही।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस को 19 सीटें मिलीं।
क्या बदला
तेलंगाना राष्ट्र समिति तेलंगाना में फिर जीती और सत्ता पर उसकी पकड़ और लंबी हुई।
अब वह राज्य में लगातार 2 चुनाव जीत चुकी है।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी 73.7% के साथ राज्य में नए शिखर पर पहुँचा।
उसकी अपनी सीटें 63 से बढ़कर 88 हो गईं।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला आसिफाबाद, तेलंगाना में रहा, जहाँ फ़ैसला 171 वोटों से हुआ।
मतगणना का सबसे एकतरफ़ा परिणाम सिद्दिपेट, तेलंगाना में आया, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 71.1% वोट रहा।
साल का सबसे ऊँचा मतदान प्रतिशत पालेर, तेलंगाना में रहा, जहाँ 92.2% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
साल में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार मल्काजगिरि, तेलंगाना में थे: मतपत्र पर 42 नाम।
पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने 6 सितंबर 2018 को, पाँच साल का कार्यकाल पूरा होने से कई महीने पहले, तेलंगाना विधान सभा भंग कर दी।1