मध्य पेंडाम-पूर्व पेंडामविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1999
संग दोरजी तमांग (SSP) ने 1999 के विधान सभा चुनाव में 50.8% वोट पाकर मध्य पेंडाम-पूर्व पेंडाम सीट जीती और दिल्ली प्रसाद खरेल (SDF) को 246 वोटों से हराया।
2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 17 खामदोंग-सिंगताम है।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। संग दोरजी तमांग 2.7% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
3 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | संग दोरजी तमांग SSP | SSP | 4,57550.8% |
| 2 | दिल्ली प्रसाद खरेल | 4,32948.1% | |
| 3 | रीता कार्की | 1021.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SSP और SDF को 99% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.04 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मध्य पेंडाम-पूर्व पेंडाम से कौन जीता, 1979–2004
SSP ने यह सीट SDF से छीन ली, जिसने इसे 1994 में जीता था; SSP ने यहाँ पिछली बार 1989 में जीत दर्ज की थी। मतदान प्रतिशत 1994 के 78.8% से बढ़कर 79.5% हो गया। इसके बाद 2004 के चुनाव में यह सीट SDF ने जीती।