सूरतगढ़विधान सभा चुनाव का परिणाम, 2003
अशोक नागपाल (BJP) ने 2003 के विधान सभा चुनाव में 44.5% वोट पाकर सूरतगढ़ सीट जीती और विजय लक्ष्मी बिश्नोई (INC) को 35,319 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 11 बीकानेर थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 11 भादरा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — अशोक नागपाल 15.0% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
12 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अशोक नागपाल NDA | NDA | 1,04,54944.5% |
| 2 | विजय लक्ष्मी बिश्नोई | 69,23029.4% | |
| 3 | सुशील कुमार NDA | NDA | 22,7249.7% |
| 4 | रामस्वरूप घोड़ेला RSNM | RSNM | 14,6066.2% |
| 5 | बसंती देवी | 12,9335.5% | |
| 6 | महावीर प्रसाद पारीक निर्दलीय | निर्दलीय | 3,1431.3% |
| 7 | ठाकर राम LPSP | LPSP | 1,7720.8% |
| 8 | रावता राम बावरी NDA | NDA | 1,7480.7% |
| 9 | भजन कौर निर्दलीय | निर्दलीय | 1,4130.6% |
| 10 | पुरखा राम बाल्मीकि निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1640.5% |
| 11 | विकासदीप | 1,0160.4% | |
| 12 | नागेन्द्र सिंह | 7670.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 84% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.32 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सूरतगढ़ से कौन जीता, 1977–2003
BJP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1998 में जीता था; BJP ने यहाँ पिछली बार 1993 में जीत दर्ज की थी। यह 1980 के बाद यहाँ का सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1998 के 67.5% से बढ़कर 69.9% हो गया।