भरतपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
राम किशन (JD) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 37.6% वोट पाकर भरतपुर सीट जीती और कु अरुण सिंह (निर्दलीय) को 5,378 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 72 सपोटरा थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 72 डीग-कुम्हेर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
7.8% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
39 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | राम किशन राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 25,80137.6% |
| 2 | कु अरुण सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 20,42329.8% |
| 3 | आर. पी. शर्मा | 12,89318.8% | |
| 4 | योगेन्द्र सिंह (गुड्डू) | 3,2024.7% | |
| 5 | बने सिंह जाटव निर्दलीय | निर्दलीय | 1,8952.8% |
| 6 | भगवान सिंह सैनी निर्दलीय | निर्दलीय | 7851.1% |
| 7 | प्रहलाद कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 7771.1% |
| 8 | सेवादास निडर निर्दलीय | निर्दलीय | 7161.0% |
| 9 | दरब सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3190.5% |
| 10 | जगदीश प्रसाद सैनी निर्दलीय | निर्दलीय | 1450.2% |
| 11 | प्रभु दयाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1440.2% |
| 12 | शिव सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1020.1% |
| 13 | निर्भय सिंह | 960.1% | |
| 14 | राम वीर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 880.1% |
| 15 | जसवंत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 870.1% |
| 16 | मदन लाल खण्डेलवाल निर्दलीय | निर्दलीय | 870.1% |
| 17 | अशोक कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 800.1% |
| 18 | राम बाबू गुर्जर LKD(B) | LKD(B) | 760.1% |
| 19 | चन्दन सिंह सैनी निर्दलीय | निर्दलीय | 720.1% |
| 20 | धनेश फक्कड़ निर्दलीय | निर्दलीय | 700.1% |
| 21 | कुन्दन लाल जैन निर्दलीय | निर्दलीय | 690.1% |
| 22 | प्रवीण कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 660.1% |
| 23 | कौशलेन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 590.1% |
| 24 | ईश्वर दास वाचवानी निर्दलीय | निर्दलीय | 580.1% |
| 25 | सुरेश चन्द शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 580.1% |
| 26 | उमेश चन्द माथुर निर्दलीय | निर्दलीय | 560.1% |
| 27 | गिरवर प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 530.1% |
| 28 | भीम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 440.1% |
| 29 | विजय सिंह जाटव निर्दलीय | निर्दलीय | 430.1% |
| 30 | मदन मोहन महावर निर्दलीय | निर्दलीय | 410.1% |
| 31 | दाता राम शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 390.1% |
| 32 | दौलत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 380.1% |
| 33 | प्रताप सिंह द्रिवार निर्दलीय | निर्दलीय | 280.0% |
| 34 | अशोक कुमार चतुर्वेदी निर्दलीय | निर्दलीय | 240.0% |
| 35 | भारत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 220.0% |
| 36 | प्रताप सिंह करौला निर्दलीय | निर्दलीय | 210.0% |
| 37 | भारत भूषण शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 150.0% |
| 38 | राम वीर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 100.0% |
| 39 | चन्द भूषण दत्ता निर्दलीय | निर्दलीय | 70.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 86% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.72 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
भरतपुर से कौन जीता, 1977–2003
JD ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 43.0% से बढ़कर 46.1% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।