मुदलियारपेटविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2006
डॉ. एम.ए.एस. सुब्रमण्यन (DMK) ने 2006 के विधान सभा चुनाव में 37.3% वोट पाकर मुदलियारपेट सीट जीती और पी. कन्नन (PMC) को 1,404 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में भी सीट नंबर 8 का नाम मुदलियारपेट था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 8 इंदिरा नगर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। डॉ. एम.ए.एस. सुब्रमण्यन 4.8% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | डॉ. एम.ए.एस. सुब्रमण्यन UPA | UPA | 10,78337.3% |
| 2 | पी. कन्नन PMC | PMC | 9,37932.4% |
| 3 | वी. सभापति उर्फ़ कोदंडरामन निर्दलीय | निर्दलीय | 7,94927.5% |
| 4 | जे. मुरुगन | 5561.9% | |
| 5 | जे. रामदास NDA | NDA | 2750.9% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.13 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
उम्मीदवारों ने क्या घोषित किया
उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफ़नामों में आपराधिक मामले घोषित किए दर्ज मामलों का मतलब सज़ा नहीं है — किसी लंबित मामले से कोई दोषी साबित नहीं होता।
घोषित संपत्ति का मध्य मान ₹2.21 करोड़ आधे उम्मीदवारों की संपत्ति इससे कम है।
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मुदलियारपेट से कौन जीता, 1974–2006
DMK ने 2001 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 41.0% से घटकर 37.3% रह गया। यह 1990 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2001 के 73.2% से बढ़कर 87.8% हो गया।
- 1974सभापति उर्फ़ कोदंडरामन (NCO), जीत का अंतर 6.2%
- 1977वी. सभापति कोदंडरामन (INC), जीत का अंतर 18.0%
- 1980वी. कोदंडरामन उर्फ़ सभापति (INC(I)), जीत का अंतर 21.2%
- 1985वी. सभापति कोदंडरामन (INC), जीत का अंतर 2.9%
- 1990एम. मंजिनी (CPI), जीत का अंतर 4.4%
- 1991वी. कोदंडरामन उर्फ़ सभापति (IND), जीत का अंतर 21.7%
- 1996एम. मंजिनी (CPI), जीत का अंतर 13.5%
- 2001डॉ. सुब्रमण्यन एम.ए.एस. (DMK), जीत का अंतर 6.8%
- 2006डॉ. एम.ए.एस. सुब्रमण्यन (DMK), जीत का अंतर 4.8%