सरायपालीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
नरसिंह प्रधान (BJP) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 50.7% वोट पाकर सरायपाली सीट जीती और पुखराज सिंह (INC) को 5,845 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 137 मारो थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 137 हरदा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
9.1% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
12 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | नरसिंह प्रधान | 32,68650.7% | |
| 2 | पुखराज सिंह | 26,84141.6% | |
| 3 | रामचंद्र विश्वकर्मा | 1,0681.7% | |
| 4 | धनीराम पटेल निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0381.6% |
| 5 | परेश्वर सिंह राय | 7421.1% | |
| 6 | मोहित राम निर्दलीय | निर्दलीय | 6701.0% |
| 7 | शेख मोहियुद्दीन निर्दलीय | निर्दलीय | 3820.6% |
| 8 | बजरंग लाल (भज्जू) सेन निर्दलीय | निर्दलीय | 3030.5% |
| 9 | मुक्ति निर्दलीय | निर्दलीय | 2850.4% |
| 10 | तजिंदर सिंह उर्फ़ बंटी निर्दलीय | निर्दलीय | 2220.3% |
| 11 | शशि भूषण पटेल निर्दलीय | निर्दलीय | 1490.2% |
| 12 | दुर्गा प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 1000.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP, INC और DDP को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.32 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सरायपाली से कौन जीता, 1977–1998
BJP ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1985 के 56.0% से बढ़कर 59.5% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।